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परिचय

आध्यात्मिक शिक्षा व्यक्तित्व विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आध्यात्मिक एवं दार्शनिक शिक्षा को समर्पित जैन विद्यापीठ एक अद्वितीय संस्था है। समाज के विभिन्न वर्गों के कई व्यक्ति यद्यपि जैन दर्शन का अध्ययन नियमित विद्यार्थी के रूप में लाभ लेना चाहते हैं परन्तु कई समस्याओं के कारण अध्ययन करने में असमर्थ होते हैं । इसलिए, मुक्त अॉनलाइन शिक्षा पर आधारित जैन विद्यापीठ की स्थापना हुई ताकि इस प्रकार की समय और जगह की बाधाओं को दूर किया जा सके ताकि अधिक से अधिक लोगों में जैन तत्त्व-ज्ञान का प्रसार हो सके।

विश्वविद्यालयों में, संस्कृत एवं कला के अन्य विषयों का जैन-दर्शन के साथ अध्ययन शास्त्री स्तर की शिक्षा के लिये आवश्यक है, अतएव कई रुचि रखने वाले इच्छुक विद्यार्थी, विशेषकर महिलाएं, इस शिक्षा सुविधा से वंचित रह जाती हैं। इस संस्था का तो प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह किसी भी जाति, आयु या वर्ग आदि का हो, उसकी इस रुचि की पूर्ति एवं जैन तत्त्व-विद्या (जैनत्व की आधारभूत शिक्षा) का प्रचार-प्रसार करने का संकल्प रहा है। जैन-धर्म की सम्पूर्ण शिक्षा को ध्यान में रखते हुए, विद्यापीठ ने कई पाठ्यक्रम तैयार किये हैं।

उद्देश्य

To imbibe practical application of Jain spiritual principles through academic platform systematically.
On completion of this course, students  –

  • Will be able to independently understand original Jain scriptures
  • Keep Jain value system alive in respective families
  • Can help upliftment of bhavya Jeev (soon to be Siddha)through dissemination of knowledge further in the society

व्यवस्थित रूप से शैक्षणिक मंच के माध्यम से जैन आध्यात्मिक सिद्धांतों के व्यावहारिक अनुप्रयोग को लागू करने के लिए इस पाठ्यक्रम के पूरा होने पर, छात्रों –

  • मूल जैन ग्रंथों को स्वतंत्र रूप से समझ सकेंगे
  • अपने परिवारों में जैन मूल्य प्रणाली को जीवित रखें
  • समाज में आगे ज्ञान के प्रसार के माध्यम से भव्य जीवों (भावी सिद्ध) के उत्थान की सहायता कर सकते हैं

लक्ष्य

To facilitate making atleast one spiritual scholar in each household!

प्रत्येक परिवार में कम से कम एक आध्यात्मिक विद्वान बनाने की सुविधा प्रदान हो सके।

सिद्धांत

This is a non-commercial activity purely for the dissemination of Jain Tattvagyan.

We will focus on any and all activities that augments understanding of Jain principles directly or indirectly but resources will be confined to knowledge part only.

यह पूरी तरह से जैन तत्वज्ञान के प्रसार हेतु एक गैर-वाणिज्यिक गतिविधि है।
हम जैन सिद्धांतों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से समझाने हेतु विभिन्न ज्ञान-वर्धक साधनों की सहायता लेंगे।

 

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